भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) के बारे में संपूर्ण और परीक्षा-केंद्रित (Exam-oriented) विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
मुख्य तथ्य और पृष्ठभूमि (Key Facts & Background)हस्ताक्षर और प्रभावी तिथि: इस ऐतिहासिक समझौते पर 18 दिसंबर 2025 को मस्कट में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से प्रभावी (Operationalized) हो गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ: यह वर्ष 2006 के बाद ओमान द्वारा किसी भी देश के साथ हस्ताक्षरित पहला द्विपक्षीय व्यापार समझौता है।
क्षेत्रीय महत्व: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बाद, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में भारत का यह दूसरा बड़ा CEPA समझौता है।
वस्तुओं के व्यापार में लाभ (Trade in Goods)इस समझौते के तहत दोनों देशों ने सीमा-शुल्क (Tariff) में भारी कटौती की है:
भारत को लाभ (Duty-Free Access): ओमान ने भारत से होने वाले 99.38% निर्यात (मूल्य के आधार पर) और 98.08% टैरिफ लाइनों पर सीमा-शुल्क को घटाकर शून्य (0%) कर दिया है। यह रियायत इसके लागू होने के पहले दिन से ही प्रभावी हो गई है।
श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-Intensive Sectors) को बढ़ावा: भारत के कपड़ा (Textiles), रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery), चमड़ा, फुटवियर, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्युटिकल्स और कृषि उत्पादों को अब ओमान के बाजारों में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा।
कृषि और खाद्य निर्यात: बासमती चावल, शहद, आलू, प्याज और समुद्री उत्पाद (जैसे झींगा और मछली) सीधे ओमान में बिना किसी कस्टम ड्यूटी के बेचे जा सकेंगे।
भारत द्वारा दी गई रियायतें: भारत ने ओमान से आने वाले 94.81% आयात मूल्य (77.79% टैरिफ लाइनों) पर रियायतें दी हैं।
घरेलू उद्योगों के लिए सुरक्षात्मक उपाय (Defensive Safeguards)भारतीय संवेदनशील उद्योगों को नुकसान से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं:अपवर्जन सूची (Exclusion List): भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि, बुलियन (सोना-चांदी), आभूषण और बेस मेटल स्क्रैप को इस छूट से बाहर रखा है।
टैरिफ रेट कोटा (TRQs): कुछ वस्तुओं के आयात की एक निश्चित सीमा (Quota) तय की गई है ताकि घरेलू बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
सेवा क्षेत्र और निवेश (Services & Investment)सेवाओं का उदारीकरण: ओमान ने भारत के लिए 127 सेवा उप-क्षेत्रों (Sub-sectors) को खोल दिया है। इसमें आईटी (IT), वित्तीय सेवाएं, व्यावसायिक सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास (R&D), शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र शामिल हैं।
पेशेवर गतिशीलता (Professional Mobility): भारतीय इंजीनियरों, डॉक्टरों, कंप्यूटर पेशेवरों और प्रबंधकों (Managers) के लिए ओमान में काम करने के वीज़ा नियम और आवाजाही आसान होगी।
द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े (Bilateral Trade Statistics)व्यापार में वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 11.18 अरब डॉलर पहुंच गया है (जो 2024-25 में 10.61 अरब डॉलर था)।व्यापार संतुलन: 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, इस व्यापार में भारत का निर्यात 4.02 अरब डॉलर और ओमान से आयात 7.16 अरब डॉलर रहा है।
रणनीतिक एवं भू-राजनीतिक महत्व (Strategic & Geopolitical Significance)चोकपॉइंट्स से बचाव: पश्चिम एशिया में तनाव (जैसे ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के पास जहाजों को रोकना) के बीच ओमान का सोहार (Sohar), दुक्म (Duqm) और सालालाह (Salalah) पोर्ट भारत के लिए बहुत सुरक्षित विकल्प हैं।
बाजार का प्रवेश द्वार (Gateway Market): ओमान के माध्यम से भारत की पहुंच न केवल खाड़ी देशों (GCC) तक बल्कि पूर्वी अफ्रीका और मध्य एशिया के बाजारों तक भी आसान हो जाएगी।डिजिटल प्रमाणपत्र (CoO): व्यापार को तेज करने के लिए इस समझौते में पूरी तरह से डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin) ढांचा शामिल किया गया है।

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